पूरा पढ़े...क्या रात्रि में "दही" का सेवन हानिकारक होता है?

आयुर्वेद के अनुसार रात के समय दही का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। जिसके कारण यह खतरनाक साबित हो सकता है। दोपहर के समय 3 बजे से पहले करना चाहिए,

रात के समय दही का सेवन करने से म्यूकस बन सकता है। आयुर्वेद के अनुसार रात को खाने से इंफेक्शन, बलगम की समस्या, मोटापा, स्किन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, इसके अलावा रात दही के सेवन से पाचनतंत्र भी डिस्टर्ब होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।

आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर रात में दही खाने पर ऐसा क्या हो जाता है? तो जान लीजिए कि रात को दही खाने पर पाचनतंत्र मंद हो जाता है। आयुर्वेद की भाषा में बात करें तो जठराग्नि मंद हो जाती है और शरीर की वायु कुपित हो जाती है। इस कारण रात में दही का सेवन करने पर हाथ, पैर, सिर, कमर या शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द की समस्या हो सकती है,

साथ ही दही खाने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता पर इस लिए बुरा असर पड़ता है, क्योंकि दही तासीर में ठंडी होती है। यदि रात में दही खाई जाती है तो शरीर में कफ की मात्रा में वृद्धि हो सकती है। इससे गले में दर्द, खराश, बलगम वाली खांसी, सिर में भारीपन, जुकाम आदि की समस्या हो सकती है,

जिन लोगों को जोड़ों के दर्द की शिकायत होती है यदि वे लोग रात के समय दही खाना शुरू कर दें तो यकीन मानिए कि जल्द ही ऐसा समय आएगा जब उनके जोड़ों का दर्द इस कदर बढ़ जाएगा कि दिन-रात का चैन खो सकता है,

जिन लोगों को अस्थमा की शिकायत है, उन्हें रात के समय भूल से भी दही का सेवन नहीं करना चाहिए। नहीं रात के समय अस्थमा अटैक के कारण सांस लेना मुश्किल हो सकता है, अगर आपके शरीर में सूजन की समस्या पहले से है या कोई चोट लगी हुई है तो रात के समय दही खाना आपके शरीर को अंदर से कमजोर करने का काम करेगा। इससे आपके शरीर में दर्द और पीड़ा कई गुना बढ़ सकती है।
अगर आपको लगता है कि आपने तो रात को दही खाई थी, आपको तो कोई समस्या नहीं हुई। 

तो यह जरूरी नहीं है कि आपने रात में दही खाई है तो अगले दिन सुबह के समय ही आपके शरीर में बीमारी के लक्षण दिखने लगेंगे। ये लक्षण दिन में किसी समय, अगली रात में या एक-दो दिन बाद भी नजर आ सकते हैं।