आगे पढ़े...लाल चंदन की पहचान, लाल चंदन के उपयोग, लाल चंदन के जबदस्त फायदे

आंध्र प्रदेश में सवा दो लाख हेक्टेयर में फैली शेषाचलम की पहाड़िया लाल चंदन के लिए काफी प्रसिद्ध हैं। लाल चंदन की लकड़ी को कर्नाटक और तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश राज्यों से ही प्राप्त किया जा सकता है। भारत से इस लकड़ी का निर्यात मुख्यतः सबस अधिक चीन तथा जापान को होता है।

लाल चंदन की पहचान 
1) इसके पेड़ की औसत ऊंचाई 8 से लेकर 11 मीटर तक होती है।

2) इस लकडी का घनत्व पानी की अपेक्षा अधिक होता है जिसके कारण यह पानी में डूब जाती है।

3) तमिलनाडु की सीमा से लगे आंध्र प्रदेश के चार जिलों नेल्लोर, कुरनूल, चित्तूर, कडप्पा में फैली शेषाचलम की पहाड़ियों में ही लाल चंदन के पेड़ पाए जाते हैं।

4) रक्त/लाल चंदन में सफेद चंदन की तरह कोई सुगंध नहीं पायी जाती है।

5) लाल चंदन की लकड़ी खून की तरह लाल होती हैं।

लाल चंदन के उपयोग
1) लाल चंदन के लकड़ी का प्रयोग पाचन तंत्र शोधन में किया जाता है।

2) शरीर में तरल का संचय करने के लिये इसे औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है।

3) लाल चंदन का प्रयोग औषधि के रुप में करके रक्त शोधन के उपचार में इसका उपयोग किया जा सकता है।

4) लाल चंदन का इस्तेमाल पूजा पाठ में भी किया जाता है।

5) औषधीय गुणों के कारण इसका प्रयोग सुंदरता को निखारने के लिए भी किया जाता है।

6) लाल चन्दन के द्वारा महंगे फर्नीचर तैयार किये जाते हैं।

7) सजावट के लिए भी इन लकड़ियों की काफी डिमांड होती है।

8) शराब और कॉस्मेटिक्स में लाल चंदन का उपयोग किया जाता है।

9) पारंपरिक वाद्ययंत्र के निर्माण के लिए मांग लाल चंदन का प्रयोग किया जाता है।

लाल चंदन के फायदे
1) जिस शरीर से दुर्गंध आती है, अगर उस पर लाल चंदन लगाया जाए तो दुर्गंध खत्म हो जाती है।

2) शरीर के जले हुए अंग ऊपर से लगाने से जलन कम होती है।

3) सुंदरता बढ़ाने के लिए भी लाल चंदन की लकड़ी का प्रयोग किया है।

4) औषधि के रूप में प्रयोग करके लाल चंदन से कफ को दूर किया जा सकता है।

5) लाल चंदन ठंडी प्रवृति का होता है जिसके कारण गर्मी के मौसम में यह फायदेमंद होता है।

6) लाल चंदन के द्वारा त्वचा संबंधित बीमारियां और पिंपल्स इत्यादि को दूर किया जा सकता है।

7) ऐसा माना जाता है कि लाल चंदन बुखार को दूर करने की भी क्षमता रखता है।