आगे पढ़े... ऐसे फूड्स जिनके सेवन से बढ़ता हैं कैंसर का खतरा

जैसा कि आप जानते ही हैं कि यदि आप स्वस्थ भोजन करते हैं, तो आप खुद में ऊर्जावान और फिट महसूस करेंगे। लेकिन अगर आपके खाने की थाली में ट्रांस फैट और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की मात्रा अधिक है, तो आलस्य और स्वास्थ्य समस्याएं होना लाजमी हैं।

साथ ही अनहेल्दी खाने की हैबिट्स लिवर, किडनी और हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बन सकती हैं, इसके अलावा शरीर में कैंसर कोशिकाएं विभिन्न कारणों से बढ़ती हैं और अनहेल्दी आहार उनमें से एक है, और हमारी आहार संबंधी आदतें ही कैंसर के खतरे को बढ़ा या घटा सकती हैं।

संसाधित मांस (Processed meat)

डॉक्टर के अनुसार किसी भी एनिमल बेस्ड प्रोडक्ट को लेना जो स्मोकिंग और साल्टिंग द्वारा प्रिजर्व यानी संरक्षित किया गया है, वो आपकी सेहत के लिए अस्वस्थ्य है। ये फूड आपका वजन बढ़ने से लेकर कैंसर तक की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को जन्म दे सकता है।

प्रोसेस्ड मीट से एक कंपाउंड यानी यौगिक उत्पन्न होता है जो कार्सिनोजेन्स हो सकता है। यह एक व्यक्ति को कोलोरेक्टल और पेट के कैंसर के विकास के जोखिम में डाल सकता है। इसलिए प्रोसेस्ड मीट जैसे हॉट डॉग, सलामी और सॉसेज के बजाय घर पर ही मीट पकाएं।

तला हुआ खाना (​Fried foods)

तले हुए खाद्य पदाथों का अत्यधिक सेवन से शरीर में कैंसर कोशिकाओं के विकार का कारण बन सकते हैं। जब आलू या मीट जैसे खाद्य पदार्थों को उच्च तापमान पर तला जाता है, तो एक्रिलामाइड नामक यौगिक बनता है।

यौगिक में कार्सिनोजेनिक गुण होते हैं और यहां तक कि डीएनए को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा, तले हुए खाद्य पदार्थ शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को भी बढ़ा सकते हैं। कैंसर कोशिकाओं के विकास से जुड़े होते हैं, इसलिए खाद्य पदार्थों को तलने के बजाय कुकिंग के दूसरे तरीकों को खोजें।

परिष्कृत उत्पाद (Refined products)

मैदा, चीनी या तेल सभी में कैंसर कोशिकाओं के विकास के जोखिम को बढ़ाने की क्षमता है। अध्ययनों से पता चलता है कि अत्यधिक रिफाइंड चीनी और कार्ब्स शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, जो शरीर में तमाम तरह के कैंसर को रास्ता दे सकते हैं।

इसलिए आपको इस तरह के फूड का बहुत थोड़ी मात्रा में सेवन करना चाहिए। चीनी के बजाय गुड़ या शहद लें, रिफाइंड कार्ब्स को आप साबुत अनाज से रिप्लेस कर सकते हैं और रिफाइंड तेल से सरसों के तेल या घी का सेवन कर सकते हैं।

शराब- कार्बोनेटेड ड्रिंक (Alcohol-carbonated beverage)

अल्कोहल और कार्बोनेटेड पेय दोनों में रिफाइंड चीनी और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। दोनों में से किसी भी तरल पदार्थ का अत्यधिक सेवन शरीर में मुक्त कणों (free radicals) की संख्या को बढ़ा सकता है, जो बदले में सूजन (inflammation) का कारण बन सकता है। शराब इम्यून फंक्शन को भी इफेक्ट करती है, जिससे आपके शरीर के लिए पूर्व कैंसर और कैंसर कोशिकाओं का पता लगाना और उन्हें टारगेट करना बहुत मुश्किल हो जाता है।

डिब्बाबंद और पैक्ड फूड (Canned and packed foods)

डिब्बाबंद या पैक्ड खाद्य पदार्थ खाने का ट्रेंड भारत में धीरे-धीरे और लगातार बढ़ रहा है। अब आप मार्केट के गलियारे में हर चीज को पैक्ड प्रोडक्ट्स में आसानी से पा सकते हैं जिन्हें पकाना भी बहुत आसान है। झटपट पोहा, नूडल, इडली, उपमा, पास्ता पैक्ड फूड्स की कई वैरायटी हैं, जिनमें से आप किसी को भी चुन सकते हैं।

सच कहें तो ये खाना पकाने की प्रक्रिया को परेशानी मुक्त बना सकता है, लेकिन यह कैंसर के विकास के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। ज्यादातर रेडी-टू-कुक फूड पैक में बिस्फेनॉल ए (बीपीए) नाम का केमिकल होता है। भोजन में घुलने पर यह यौगिक हार्मोनल असंतुलन, डीएनए में परिवर्तन और कैंसर का कारण बन सकता है।