आगे पढ़े...आयुर्वेद के अनुसार क्या है संभोग करने का सही समय

आयुर्वेद में अलग-अलग वक्त पर संभोग करने के अलग मतलब और इसके फायदे-नुकसान बताए गए हैं। भारतीय आयुर्वेद में सेक्स करने का सही समय, मौसम और पोजिशन के बारे में भी बताया गया है।


आयुर्वेद में माना जाता है कि सुबह 6 बजे से 8 बजे के दौरान पुरुष सबसे ज्यादा उत्तेजित होते हैं, हालांकि इस दौरान महिलाएं नींद में होती हैं और उनके शरीर का तापमान कम होता है। इसलिए इस वक्त संभोग पुरुषों के लिए तो बढ़िया रहता है लेकिन महिलाओं इस वक्त संभोग ज्यादा एंजॉय नहीं करतीं।

माना जाता है कि इस वक्त महिलाएं उत्तेजित होती हैं लेकिन पुरुषों का टेस्टोस्टेरॉन लेवल सामान्य होता है लिहाजा वे संभोग के बजाए बढ़िया ब्रेकफस्ट की तलाश में हो सकते हैं।

आयुर्वेद की मानें तो दोपहर 2 बजे से 4 बजे के दौरान महिलाओं का रिप्रोडक्टिव सिस्टम काफी सक्रिय होता है तो अगर कंसीव करना चाहते हैं तो यह वक्त सही है।

आयुर्वेद के हिसाब से कहीं-कहीं यह भी लिखा पाया गया है कि संभोग से शरीर में वात दोष बढ़ता है इसलिए सूरज निकलने के बाद से सुबह 10 बजे तक का समय सेक्स के लिए बेस्ट होता है।

वर्तमान की भाग-दौड़ वाली लाइफस्टाइल को देखते हुए यह संभव नहीं तो हल्के डिनर के बाद रात 8 बजे से 10 बजे तक का समय संभोग के लिए अच्छा माना जाता है। 

आयुर्वेद के मुताबिक खाली पेट या भारी खाने के बाद संभोग करने से वात का बैलेंस बिगड़ सकता है, इससे डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं, सिरदर्द और गैस्ट्रिक हो सकता है। संभोग से पहले हल्का खाना खाएं।

सर्दी और बसंत ऋतु की शुरुआत सही मौसम माने जाते हैं। गर्मी और पतझड़ के समय वात बढ़ जाता है इसलिए हमें संभोग और ऑर्गैज्म की फ्रीक्वेंसी कम कर देनी चाहिए।

आयुर्वेद के मुताबिक माना जाता है कि बेस्ट सेक्स पोजिशन वह है जिसमें महिला पीठ के बल मुंह ऊपर की ओर करके लेटे।