हाई ब्लड प्रेशर को उसके कारणों के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा जाता है - प्राइमरी और सेकेंडरी। प्राइमरी हाइपरटेंशन का कारण अज्ञात है जबकि सेकेंडरी हाइपरटेंशन थाइराइड, स्लीप एपनिया जैसे अन्य बिमारियों की वजह से होता है। खराब जीवनशैली ब्लड प्रेशर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण करक है।
1. प्राइमरी हाई ब्लड प्रेशर के कारण:
ज्यादातर मामलों में ब्लड प्रेशर बढ़ने का कारण पता नहीं चल पाता है। इसे प्राइमरी हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है। यह समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होता है।
2. सेकेंडरी हाई ब्लड प्रेशर के कारण:
कुछ लोगों को हाई बीपी किसी अन्य बीमारी की वजह से हो जाता है। इसे सेकेंडरी हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है। कुछ बीमारियां जिनके कारण सेकेंडरी हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है, इस प्रकार हैं:
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया
गुर्दे की बीमारियां
एड्रेनल ग्लैंड में ट्यूमर
थायरॉयड समस्याएं
कुछ दवाएं, जैसे गर्भनिरोधक गोलियां, जुकाम की दवा, और ओवर-द-काउंटर पेन किलर
अवैध दवाएं या ड्रग्स, जैसे कोकीन
ज्यादा शराब पीना या शराब की लत
ब्लड प्रेशर बढ़ने का जोखिम बढ़ाने वाले कारक
ऐसे कई कारक हैं जो ब्लड प्रेशर बढ़ने के जोखिम को बढ़ा देते हैं। इनमें से कुछ हैं -
बढ़ती उम्र - उम्र बढ़ने के साथ-साथ हाई बीपी होने का जोखिम अधिक होता है
अनुवांशिकता - अगर आपके परिवार में किसी करीबी सदस्य (माता या पिता) को हाई ब्लड प्रेशर है, तो आपको यह रोग होने की संभावना काफी अधिक हो सकती है
मोटापा - सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में अधिक वजन वाले और मोटापे से ग्रस्त लोगों में बीपी बढ़ने होने की संभावना अधिक होती है
शारीरिक गतिविधियों की कमी - व्यायाम की कमी के साथ-साथ एक गतिहीन जीवनशैली से भी बीपी बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है
धूम्रपान करना - धूम्रपान करने के कारण रक्त वाहिकाएं संकीर्ण हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप हाई ब्लड प्रेशर होता है (और पढ़ें – सिगरेट पीने के नुकसान)
शराब पीना - जो लोग नियमित रूप से शराब पीते हैं उनको अन्य लोगों की तुलना में सिसटोलिक रक्तचाप अधिक होता है (और पढ़ें – शराब छोड़ने के तरीके)
ज्यादा नमक खाना - ज़्यादा नमक खाने वालो की तुलना में जहां लोग कम नमक खाते हैं वहाँ रक्तचाप कम होता है
वसा-युक्त आहार का ज्यादा सेवन - सॅचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट आपके लिए खराब होती है
मानसिक तनाव - विभिन्न अध्ययनों के अनुसार मानसिक तनाव का रक्तचाप पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है
डायबिटीज - डायबिटीज के रोगियों को हाई बीपी होने का जोखिम अधिक होता है, चाहे उन्हें टाइप 1 मधुमेह या टाइप 2 मधुमेह
गर्भावस्था - प्रेगनेंसी में हाई बीपी होने का भी जोखिम रहता है